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Ishwar Jaagta Kyon Nahin? | ईश्वर जागता क्यों नहीं?

Ishwar Jaagta Kyon Nahin? सूरज चोरी चला गया है, हर एक जिस्म से ग़ायब है रीढ़ की हड्डी। सत्य, अहिंसा, न्याय, शांति  सब किसी परीकथा के पात्र हैं...

Ishwar Jaagta Kyon Nahin?

Ishwar-Aakhir-Jaagta-Kyon-Nahin?


सूरज चोरी चला गया है,
हर एक जिस्म से ग़ायब है रीढ़ की हड्डी।
सत्य, अहिंसा, न्याय, शांति 
सब किसी परीकथा के पात्र हैं, शायद
और उम्मीद गूलर के फूल सरीखी कोई किवदंती

धर्म सबसे चमकीला तारा है
जिसने ले रखी है सूरज की ख़ाली जगह
क्योंकि अब रोशनी नहीं, ज़रूरत है आग की

जंगल सभ्य हैं और सभ्यताएँ क्रूर
सारी हथेलियाँ 'लेडी मैकबेथ' की हथेलियाँ हैं
और सारी आँखें 'गाँधारी' की आँखें

शायद ये दुनिया 
किसी सोये हुए ईश्वर का एक डरावना स्वप्न है

"ईश्वर आख़िर जागता क्यों नहीं?"

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